सोमवार 12 जनवरी 2026 - 21:17
ईरान मे प्रदर्शन, अमेरिका और इजराइल सहित तकफ़ीरीयो ने इस प्रदर्शन को क्यो बढ़ा चढ़ा कर पेश किया?

हौज़ा / यू तो इस्लामी गणतंत्र ईरान मे विरोध प्रदर्शन, व्यापारी वर्ग ने शुरू किया था, लेकिन ईरान के दुशमन अमेरिका और इजराइल तथा तकफ़ीरीयो ने बहुत जल्दी उसे हिंसा बनाने का प्रयास किया और यह आंतकवादी टोला कुछ क्षेत्रो मे जनता और सरकारी समपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा फोर्स के शहीद करने मे सफल भी हुआ।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,  यू तो इस्लामी गणतंत्र ईरान मे विरोध प्रदर्शन, व्यापारी वर्ग ने शुरू किया था, लेकिन ईरान के दुशमन अमेरिका और इजराइल तथा तकफ़ीरीयो ने बहुत जल्दी उसे हिंसा बनाने का प्रयास किया और यह आंतकवादी टोला कुछ क्षेत्रो मे जनता और सरकारी समपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा फोर्स के शहीद करने मे सफल भी हुआ, लेकिन इस बार भी जनता ने समझदारी दिखाई और दुशमन एक बार फिर नामुराद हुआ।

حوزہ نیوز ایجنسی | یوں تو اسلامی جمہوریہ ایران میں احتجاجی مظاہرہ، تاجر برادری نے شروع کیا تھا؛ تاہم ایران کے قسم خوردہ دشمن: امریکہ، اسرائیل اور تکفیریوں نے بہت جلد اسے متشدد بنانے کی کوشش کی اور یہ دہشت گرد ٹولہ کچھ علاقوں میں عوامی اور حکومتی املاک کو نقصان پہنچانے اور سیکیورٹی فورسز کو شہید کرنے میں کامیاب بھی ہوا؛ لیکن اس بار بھی عوام نے بصیرت کا عظیم مظاہرہ کیا اور دشمن ایک مرتبہ پھر نامراد ہوئے۔

ट्रम्प की प्रदर्शन के नाम पर दंगो मे हार के बाद लामबंदी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की है कि वह इस्लामी गणतंत्र के मुखालेफ़ीन से संपर्क मे है और अगर सम्भव हुआ तो अमेरिका ईरान के इंटरनेट को बहाल करेगा।

ज्ञात रहे इंटरनेट की बंदिश का मुद्दा भी ईरान का आंतरिक मुद्दा है और यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल से संबंधित है, हालाकि ट्रम्प ने आदत से मजबूर होकर फ़िर हस्तक्षेप किया है।

देश मे बग़ावत और विदेशी शैतानी ताकतो को लिप्त देखने के बाद इस्लामी गणतंत्र की सुरक्षा काउंसिल ने इंटरनेट को कंट्रोल कर लिया है, हालाकि दुशमन का कम से कम प्रभाव हो। 

ट्रम्प ने ईरान मे सशस्त्र आतंकवादीयो की कार्रवाईयो का उल्लेख किए बिना इस्लामी गणतंत्र ईरान के आंतरिक मुद्दो मे हस्तक्षेप किया और हमेशा की तरह मीडिया और ईरान दुशमनी को दोहराते हुए दावा किया है कि वह ईरानी जनता के इस्लामी गणतंत्र के हाथो नरसंहार को बहुत अधिक गंभीर ले रहा है।

ट्रम्प की बाते, एक दीवाने की बाते जैसी है, दीवाना व्यक्ति लाम्बंदी करता रहता है, क्योकि उसकी बुद्धि  ठिकाने पर नही है।

ट्रम्प यह बाते ऐसी समय मे कर रहा है कि जब इस्लामी गणतंत्र ईरान ने सैकड़ो आतंकवादीयो को अमेरिका और इजराइली समर्थन के सबूत के साथ गिरफ्तार कर लिया है।

ट्रम्प को अगर मानवधिकार की इतनी फ़िकर है तो पहले अपने देश मे मानवधिकार का व्यवहारिक करें, क्योकि आप ने मीडिया पर तो देखा होगा कि बीते कुछ दिनो अमेरिका मे प्रदर्शन के दौरान महिलाओ पर किस क़द्र ज़ुल्म व सितम किया गया ?

ट्रम्प को अगर मानवधिकार की फ़िकर है तो फ़िर ईरानी जनता पर दसयो साल से जारी अत्याचारी और अमानवीय प्रतिबंध क्या है?

दुनिया जानती है कि इसी ट्रम्प ने ही घोषणा की थी कि हम ने ही आईएसआईएस को वुजूद दिया और इस पर सात ट्रिलियन डॉलर खर्च किए।

आपको याद होगा कि सीरिया पर जब आईएसआईएस ने हमला किया तो आईएसआईएस घायलो को उपचार इजराइल के अस्पतालो मे होता रहा।

हालिया 12 दिव्सीय इजराइल ईरान युद्ध मे भी ट्रम्प ने इजराइल का समर्थन का केवल खुलकर घोषणा की, बल्कि खुद इसी मानवधिकार के दावेदार ने शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रो को निशाना भी बनाया।

याद रहे कि ट्रम्प ने हालिया प्रदर्शन के नाम पर आंतकवाद समूहो की कार्रवाईयो का समर्थन करते हुए कहा था कि हम आतंकवादी समूहो के हित मे फ़ौजी कार्रवाई करेंगे।

अब जबकि इस्लामी गणतंत्र ईरान के अंदर जनता की समझदारी से किराए के दंगाई और आतंकवादी तंहा रह गए है और जनता ने किराए के आतंकवादी समूहो से अपना रास्ता अलग कर लिया तो ट्रम्प इस्लामी गणतंत्र की सुरक्षा को फिर से अशांत करने के लिए किराए के टट्टूओ को उकसाने की कोशिश कर रहा है।

सवाल

सवाल यह है क्या ईरान मे ऐसा प्रदर्शन पहली बार हुआ ?

क्या दुनिया के विभिन्न क्षेत्रो मे महंगाई, करप्शन और सरकार विरोधी प्रदर्शन नही होता ?

इन सवालो के जवाब निश्चित रूप से हा मे ही है।

तो फिर ईरानी मामलात को राष्ट्रीय मीडिया, सोशल मीडिया, अमेरिका और इजराइल सहित तकफीरी क्यो उछालते है? 

जवाब स्पष्ट हैः

ईरान आंखो मे आखे डालकर अपने दुशमन से बात करता है और किसी भी स्थिति मे फ़िलिस्तीन से ग़द्दारी करने के लिए तैयार नही है, बल्कि कठिन हालात मे भी फिलिस्तीन के मुद्दे से पीछे न हटने का ऐलान करता है और इस्लामी जगत को फिलिस्तीन सहित दूसरे मज़लूमीन से संबंधित अवगत करता रहात है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने हमेशा की तरह, अमेरिका और इजराइल की निगरानी मे होने वाले इन प्रदर्शन के नाम पर दंगो मे दुशमन को हार से दोचार किया है, अलबत्ता शहादते भी दी है जो कि इस कौम की पहचान है।

प्रिय पाठको से आग्रह है कि इन हकीकतो को हक़ीक़त पसंद और आज़ादी पसंद लोगो तक पहुंचाए।

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